faiz ahmad shayari in hindi.

faiz ahmad faiz shayari in hindi.

Faiz Ahmad Faiz was a renowned Urdu poet and writer known for his revolutionary and romantic poetry. His poetry reflects his strong belief in social justice, equality, and freedom, as well as his love for humanity and the beauty of the natural world. Faiz’s poetry has been widely translated into many languages and has been appreciated by people from all walks of life. His work continues to inspire and move people, and his legacy remains an important part of Urdu literature. So here we mention the best faiz ahmad shayari in hindi.

मैंने समझा था कि तू है तो दरख़्शां है हयात,
तेरा ग़म है तो ग़मे-दहर का झगड़ा क्या है,
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात,
तेरी आँखों के सिवा दुनिया मे रक्खा क्या है।
रात यूँ दिल में तेरी खोई हुई याद आई,
जैसे वीराने में चुपके से बहार आ जाये,
जैसे सहराओं में हौले से चले बादे-नसीम,
जैसे बीमार को बेवजह करार आ जाये।
तेरी आमद से घटती उम्र जहाँ में सब की,
फैज़ ने लिखी है यह नज़्म निराले ढब की।
फिर नजर में फूल महके दिल में फिर शम्में जलीं,
फिर तसव्वुर ने लिया उस बज़्म में जाने का नाम।
उठ कर तो आ गए हैं तिरी बज़्म से मगर,
कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आए हैं।
 faiz ahmad faiz shayari in hindi.
गुलों में रंग भरे बाद-ए-नौ-बहार चले,
चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले।
तू जो मिल जाये तो तक़दीर निगूँ हो जाये,
यूँ न था मैने फ़क़त चाहा था यूँ हो जाये।
कहाँ तक सुनेगी रात कहाँ तक सुनायें हम,
शिकवे सरे-शब आज तेरे रूबरू करें।
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी,
सुनते थे कि वो आयेंगे सुनते थे सहर होगी।
और भी गम है जमाने में मुहब्बत के सिवा,
राहतें और भी है वस्ल की राहत के सिवा।
अब अपना इख़्तियार है चाहे जहाँ चलें,
रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम।
ग़म-ए-जहां हो, रुख़-ए-यार हो, कि दस्त-ए-अदू,
सुलूक जिस से किया हमने आशिक़ाना किया।
 faiz ahmad faiz shayari in hindi.
जुदा थे हम तो मयस्सर थीं कुर्बतें कितनी,
वहम हुए तो पड़ी हैं जुदाइयाँ क्या-क्या।
तोद दिया तस्बी को इस ख्याल से फ़राज़, क्या जिन-जिन के नाम लेना उसका जो व्यवहार देता है।
भूले से मुस्कुरा तो दिए वो आज 'फैज', मत पुछ वलवाले दिल ए-ना करदा-कर के।
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तोड़ दिया तस्बी को इस ख्याल से फ़राज़ क्या जिन-जिन के नाम लेना उसका जो व्यवहार देता है
ये दिल के दाग तो दुखे द यू भी, पर काम-कम, कुछ अबके और है हिजरान-ए-यार का मौसम।
अपने ही होते हैं जो दिल पर वार करते हैं फ़राज़, वरना गैरों को क्या ख़बर की दिल की जगह कौन सी है।
अब तेरा ज़िक्र भी शायद ही ग़ज़ल में आए, और से और हुआ दर्द का उन्वां जाना।
ज़माने के सवालों में हंस के ताल दूँ फ़राज़ लेकिन नामी आँखों की कहती है “मुझे तुम याद आते हो।
 faiz ahmad faiz shayari in hindi.
वो बात सारे फसाने में जिसका जिक्र नहीं, वो बात उनको बहुत नागवार गुजरी है।
सजाओ बज्म गजल गाओ जाम ताजा करो, बहुत सही गम-ए-गीत शराब शराब कम क्या है।
मन की तुम गुफ्तगू के पंखे में माहिर हो फ़राज़, वफ़ा के लफ़्ज़ पे अटको तो हमें याद कर लेना।
भीगी है रात फैज़ ग़ज़ल इब्तिदा करो, वक़्त-ए-सरोद, दर्द का हंगामा ही तो है।
हम अपनी रूह तेरे जिस्म में छोड़ आए फ़राज़, तुझे गले से लगाना तो एक बहाना था।
अब भी ख़िज़ान का राज है लेकिन कहीं कहीं, गोशा-ए-रह-ए-चमन में ग़ज़ल-ख़्वान हुए तो है।
एक नफरत ही नहीं दुनिया में दर्द का सबब फ़राज़, मोहब्बत भी सुकून वालों को बड़ी तकलीफ़ देती है।
 faiz ahmad faiz shayari in hindi.
भूले से मुस्कुरा तो दिए वो आज 'फैज', मत पुछ वलवाले दिल ए-ना करदा-कर के।
अब यूज़ रोज़ ना सोनचू तो बदन टूट ता है फ़राज़, उमर गुज़री है उस की याद का नशा किए हुए।
वो बात सारे फसाने में जिसका जिक्र नहीं, वो बात उनको बहुत नागवार गुजरी है।
तुम्हारी एक निगाह से क़त्ल होते हैं लोग फ़राज़, एक नज़र हम को भी देख लो के तुम बिन ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती।
मोहतसिब की खैर ऊंचा है उसी के फैज से, रिंद का, साकी का, मेह का, खुम का, पैसेने का नाम।
वो बात बात पे देता है परिन्दों की मिसाल, साफ-साफ नहीं कहता मेरा सहर ही छोड़ दो।
 faiz ahmad faiz shayari in hindi.
फ़ैज़' मैं शायर वही हूं शाम-ए-तन्हाई में कल, धड़कनों के साज़ पर जिस की ग़ज़ल गाई गई।
अब अपना इख्तियार है चाहे जहां चले, रहबर से अपनी राह जुदा कर चुके हैं हम।
जूनु में जितनी भी गुजरी बेकर गुजरी है, अगरचे दिल पे खराब गुजरी है।
क़र्ज़-ए-निगाह-ए-यार अदा कर चुके हैं हम, सब कुछ निसार-ए-रह-ए-वफा कर चुके हैं हम।
वो बात, सारे फसाने में जिसका जिक्र न था, वो बात उनको बहुत नागवार घुजरी है।
दुनिया ने तेरी याद से बेगाना कर दिया, तुझ से भी दिल-फ़रेब है गम रोज़गार के।
जब तुझे याद कर लिया, सुबह महक-उथी, जब तेरा गम जग लिया, रात मचल-मचल गई।
दुनिया ने तेरी याद से बेघाना कर दिया, तुझ से भी दिल फरेब है गम रोजगार के।

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