life poems in hindi

Hindi Poem On Life

निभा रहा हूँ अपना किरदार जिदंगी के मंच पर
परदा गिरते ही तालीयाँ बजना अभी बाकी है,
कुछ नहीं गया हाथ से अभी तो, दीप
बहुत कुछ पाना बाकी हैं…
वक्त को करने दो अपनी मनमानी,
मेरा वक्त आना अभी बाकी है,
कर रहे है सवाल मुझे जो loser समझ कर,
उन सबको जवाब देना अभी बाकी है।
चल रहा हूँ मन्जिल के सफर मैं,
मन्जिल को पाना अभी बाकी हैं,
कर लेने दो लोगों को चर्चे मेरी हार के,
कामयाबी का शोर मचाना अभी बाकी है।
गुजर रही है उम्र,
पर जीना अभी बाकी हैं।
जिन हालातों ने पटका है जमीन पर,
उन्हें उठकर जवाब देना अभी बाकी हैं।

Hindi Poem On Life

Hindi Poem On Life
जब हो रहा हो मन हताश
और विश्वास में न रहे कोई आस,
तब खुद को बच्चा समझ लेना
और हर मन को सच्चा समझ लेना….
जब राहों में कॉँटे ही काँटे हो
और मुश्किलों के पत्थर राह रोकें हो,
तो खुद को वो शिल्पकार समझ लेना
जो पत्थर को तराशकर ईश्वर बना दे….
जब मंज़िल दूर लगे
और पग पग पर भी ठोकर लगे,
तो खुद को दीवार पर चढ़ती नन्ही चींटी समझ लेना
जो सौ बार फिसलती है पर हिम्मत नही खोती है…..
ज़िन्दगी के किसी दौर में
जब तुम खुद को अकेले पाओ,
तो खुद को चाँद समझ लेना
जो अकेले ही स्याह रातों को उजियारीत करता है….

Zindagi Poems In Life 

सहारा बनेगा मेरा वो इस जीवन में
मेरी जिंदगी में भी वो लम्हा आयेगा!
कभी कोई तो होगा मेरा भी जीवन में
जो यहां मेरा सिर्फ मेरा कहलाएगा!
पर थोड़ी उम्मीद तो अभी बाकी है।
कि ये जीवन मेरा भी संभल जाएगा!
धुंधला धुंधला सा है शमा आज यहां
जो लम्हा है संग वो भी गुजर जायेगा!
एक पल में बदल जाती है जिंदगी यहां
जो है राहें वो कल कहां नजर आयेंगी!
अजीब सी कशमकश है जिंदगी की
आज क्या है और कल क्या हो जाएगी!

Life Poem On Hindi

न रूठा किसी से कीजिये,
न झूठा वादा किसी से कीजिये,
कुछ फुरसत के पल निकालिये,
कभी खुद से भी मिला कीजिये..
न परेशान किसी को कीजिये,
न हैरान किसी को कीजिये,
कोई लाख गलत भी बोले,
बस मुस्कुरा कर छोड़ दीजिये…
न चादर बड़ी कीजिये,
न ख्वाहिशें दफन कीजिये,
चार दिन की ज़िन्दगी है,
बस चैन से बसर कीजिये…

Hindi Poems On Life

दिल और दिमाग़ की इसी कश्मकश में
ज़िन्दगी के पन्ने बड़ी रफ़्तार से पलटटे जा रहे हैं।
उतना तो हम जीए ही नहीं अभी तक
जितना हम हर रोज़ बेवजह मरते जा रहे हैं।
सोचते हैं वक़्त बहुत है हमारे पास
इतनी भी क्या जल्दी पड़ी है
अभी औरों के हिसाब से चल लें
ख़ुद के लिए तो सारी उम्र पड़ी है।
लोग क्या कहेंगे इस बात पर हम
कुछ यूँ उलझते जा रहे हैं।
दिल कुछ और करना चाहता है।
हम कुछ और ही करते जा रहे हैं।

Hindi Poem On Life

आखिर खत्म हो गया एक किस्सा मेरी जिंदगानी का
पर नाज रहेगा हमेशा अपनी कहानी पर।
इस खुशी का एक ही इंसान मोहताज था
मेरी जान मेरी धड़कनों का वो ताज था..
मेरे भाई हसा नहीं कभी खुद के लिए
जिया हो जिंदगी पर ना कभी अपने लिए
जवाब सुनकर वह भी रोने लगा
कहीं ना कहीं मेरे दर्द में खोने लगा
ऐसे में जब मैं हल्का सा मुस्कुराया
नजरें उठाई और तब सवाल ठुकराया
दो पल ठहर के मेरे पास वह आया
पूछा मिली थी जो खुशी उसे क्यों ठुकराया

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