intezaar shayari

intezaar shayari

वो न आएगा हमें मालूम था,
कुछ सोच कर इंतजार करते रहे !
intezaar shayari
किसी रोज होगी रोशन मेरी भी जिंदगी,
इंतजार सुबह का नहीं तेरे लौट आने का है।
intezaar shayari
मैं आज भी तेरा इन्तजार कर रहा हूँ,
बस एक बार लौट आओ मेरे पास !
intezaar shayari
संभव ना हो तो साफ मना कर दें,
पर किसी को अपने लिए इंतजार ना करवाएं !
intezaar shayari
पल भर का प्यार और बरसों का इंतज़ार,
जैसे कोई अपना ही अपने घर को लूट रहा है !
मैं बहुत जल्द लौट आऊँगा
तुम मिरा इंतिज़ार मत करना
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
सब इंतजार में थे कब कोई ज़बान खुले
फिर उसके होंठ खुले और सबके कान खुले
कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी
सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी
तेरे आने की जब ख़बर महके
तेरी खुश्बू से सारा घर महके
उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में
जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था
न हुआ नसीब क़रार ए जाँ हवस ए क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं
वो आ रहे हैं, वो आते हैं, आ रहे होंगे
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने
कदर नही होती जब मिल जाता है सब आसानी से
बहुत जरूरी है जिंदगी में इंतजार होना

Intezaar Shayari In Hindi

जो तेरे साथ रहते हुए सोगवार हो
लानत हो ऐसे शख़्स पे और बेशुमार हो
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में
रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
कहीं वो आ के मिटा दें न इंतिज़ार का लुत्फ़
कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी
ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता
अब जो पत्थर है आदमी था कभी
इस को कहते हैं इंतिज़ार मियाँ
इक रात वो गया था जहाँ बात रोक के
अब तक रुका हुआ हूँ वहीं रात रोक के
कोई आया न आएगा लेकिन
क्या करें गर न इंतिज़ार करें
माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

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